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108 एंबुलेंस कर्मचारियों का फूटा आक्रोश, सम्मान फाउंडेशन पर गंभीर आरोप, 28 जुलाई से राज्यव्यापी हड़ताल की चेतावनी

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पलामू
झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ और सम्मान फाउंडेशन के बीच विवाद गहराता जा रहा है। आज पलामू जिले में आयोजित 108 एंबुलेंस कर्मचारियों के दस्तावेज सत्यापन कार्यक्रम के दौरान कर्मचारियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। संघ ने सम्मान फाउंडेशन पर श्रम कानूनों के उल्लंघन और कर्मचारियों को धमकाने का गंभीर आरोप लगाया है।
संघ के अनुसार, 26 जून 2025 को संस्था और कर्मचारी संघ के बीच कुल 9 बिंदुओं पर आपसी समझौता हुआ था, जिसमें कर्मचारियों को PF (प्राविडेंट फंड), ESIC (ईएसआईसी) जैसी सुविधाएं और लेबर एक्ट के तहत औपचारिक नियुक्ति देने की बात शामिल थी। साथ ही, यह तय हुआ था कि दस्तावेजों का सत्यापन सिविल सर्जन की अध्यक्षता में होगा।
लेकिन संघ का आरोप है कि अब तक संस्था ने इन किसी भी बिंदु को लागू नहीं किया है। उल्टा, संस्था द्वारा कर्मचारियों से जबरन नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं, जो लेबर एक्ट के खिलाफ है। PF और ESIC से जुड़ी कोई भी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है।


इस मुद्दे को लेकर जब संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी और अन्य सदस्यों ने विरोध दर्ज कराया, तो संस्था के प्रतिनिधियों ने पुलिस कार्रवाई और नौकरी से निकालने की धमकी दी। कर्मचारियों को जबरन दस्तावेज सत्यापन के लिए बाध्य किया गया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो 22 जुलाई को एकदिवसीय धरना प्रदर्शन के बाद 28 जुलाई से पूरे झारखंड में एंबुलेंस सेवा ठप कर दी जाएगी। यह हड़ताल सम्मान फाउंडेशन के रांची स्थित कार्यालय के समक्ष आयोजित की जाएगी।  स्थिति पर प्रशासन और सरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अगर यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।

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